बीजापुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जोगी) के जिलाध्यक्ष सकनी चंद्रैया ने बैलाडीला की खान को अडानी की कंपनी को दिए जाने और पेड़ों की कटाई पर गहरा ऐतराज जताया है। उनके मुताबिक इस डिपाॅजिट के खुलने से ना केवल दंतेवाड़ा बल्कि बीजापुर जिले की नदियों और जंगलों का इको सिस्टम गड़बड़ा जाएगा।
जेसीसीजे के अध्यक्ष सकनी चंद्रैया ने कहा है कि बैलाडिला की पहाड़ियों से मरी, तालपेरू और मिंगाचल नदियां निकलती हैं और इनका बहाव बीजापुर जिले में है। अभी भी तालपेरू में बैलाडिला का लाल पानी आ रहा है। अब ये पानी मिंगाचल और मरी नदियों में मिलेगा। ये दोनों इंद्रावती की सहायक नदियां हैं और इससे सीधे तौर पर इंद्रावती भी मैली हो जाएगी।
नदियों में प्रदूषण होने से इनमें रहने वाली मछलियां और दीगर जीवों पर खतरा मण्डराएगा और समूचा इको सिस्टम खराब हो जाएगा। अडानी कंपनी ने नंदराज पर्वत और पिट्टोड़मेटा की पहाड़ियों में हजारों पेड़ काट डाले हैं। इससे पर्यावरण पर सीधा असर पड़ेगा। सरई वन बता पेड़ों को काट डाला गया जबकि ये मिश्रित वन है।
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सकनी ने सवाल दागा कि भूपेश सरकार की ओर से पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी या जलाने की। जेसीसीजे छग की एकमात्र मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टी है और 'छत्तीसगढ़ प्रथम' के मकसद को लेकर ये दल छग की आस्था और पर्यावरण को बचाने संघर्षरत है।
कांग्रेस दो मुंही, आदिवासियों से छलावा: जेसीसीजे अध्यक्ष सकनी चंद्रैया ने कहा कि रमन सरकार की तरह भूपेश सरकार भी अडानी की कंपनी एईएल पर उतनी ही मेहरबान है। 12 फरवरी को वन मंत्री मो. अकबर और पर्यावरण एवं वन विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता वाले पर्यावरण मण्डल ने कंसेट टू एस्टेबलिशय यानी स्थापना की मंजूरी दी। 2 मिलियन टन सालाना आयरन ओर खनन की मंजूरी मण्डल की ओर से दी गई। इधर, कांग्रेसी नेता दिखावे के लिए इसका विरोध कर आदिवासियों से छलावा कर रहे हैं।



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