भोपालपटनम। कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार की रात शिव मंदिर में भजन कीर्तन का कार्यक्रम रखा गया था। एक दिन पहले से ही जन्माष्टमी की गूंज नगर में दिखाई दे रही थी कल जन्माष्टमी व्रत रखा गया था व आज कृष्णाष्टमी का व्रत है। इस वर्ष की जन्माष्टमी में 14 वर्षों के बाद तीन संयोग एक साथ बने है।
भगवान कृष्ण का जन्म भाद्र मास की अष्टमी तिथि को अर्द्धरात्रि में हुआ था। भगवान के जन्म की खुशियां मनाने के लिए युवा और बच्चे गोविंदा बनकर जन्माष्टमी के दिन दही हांडी का आयोजन करते हैं।
नगर में जगह-जगह चौराहों पर दही और मक्खन से भरी मटकियां लटकाई गईऔर गोविंदाओं द्वारा एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर इसे तोड़ा गया है। पहली मटकी शिवमंदिर के सामने फोड़ी गई। रिमझिम बारिश व डीजे की धुन पर थिरकते हुए पुरे नगर में घूम-घूमकर गोविंदाओं ने दही मटके फोड़े हैं।
भगवान कृष्ण को बचपन से प्रिय था माखन बचपन में भगवान कृष्ण को दही और मक्खन अतिप्रिय था। वह अक्सर गोपियों की मटकियों से माखन चुराकर खाया करते थे। गोपियां उनसे परेशान होकर यशोदा मैय्या से उनकी शिकायत किया करती थीं। यशोदा मैय्या अपने कान्हा को समझाती-बुझाती, लेकिन उन पर कोई असर नहीं होता था।
गोपियां कन्हैया से अपना दही मक्खन बचाने के लिए मटकियों और हांडियों को ऊंचाई पर टांग देती थीं। लेकिन कान्हाजी चतुराई से दोस्तों के ऊपर चढ़कर मटकी में से दही और मक्खन चुरा लेते थे। कई बार वह शरारत में दही से भरी मटकियां फोड़ भी देते थे। कृष्ण की इन नटखट शरारत से भरी बाल लीलाओं को याद करते हुए दही हांडी का उत्सव मनाया जाता है।