पंकज दाऊद @ बीजापुर। इन दिनों यहां महादेव तालाब में अपनी जीभ तर करने आने वाले उड़न स्तनधारी 'चमगादड़ों' की शामत ही आ गई है। ये मांस और दवा के लिए गुलेलबाजों का शिकार हो रहे हैं।
चमगादड़ यानि इंडियन फ्लाईंग फाॅक्स या ग्रेटर इंडियन फ्रूट बैट झुण्ड में इस भीषण गर्मी में पानी की पूर्ति के लिए यहां महादेव तालाब में सूरज के ढलते ही मण्डराने लगते हैं। फलों के रस से पानी की पूर्ति नहीं हो पाने के चलते इन्हें तालाब तक आना पड़ता है। ये तालाब के उपर कुछ इस तरह उड़ते हैं कि वे अपनी जीभ पानी में डूबों लें और जीभ तर हो जाए।
बड़ी संख्या में आने वाले इन स्तनधारियों पर गुलेलबाजों की गिद्धदृष्टि बनी रहती है। सूरज ढलने के बाद गुलेलबाज तालाब के किनारे गुलेल लिए इन्हें निशाना बनाते हैं। एक गुलेलबाज ने बताया कि वे इसे खाने के लिए ले जाते हैं। इसका मांस बड़ा लजीज होता है और इसकी वे तरकारी बनाते हैं। वे बताते हैं कि इसके मांस में औषधीय गुणधर्म होते हैं।
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ज्ञात हो कि केवल हिन्दुस्तान में ही नहीं बल्कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी चमगादड़ों का शिकार होता है। पाकिस्तान में इसके मांस में गठिया रोग ठीक होने की बात कह इसे मार दिया जाता है और नतीजतन, इनकी संख्या वहां गिरी है।
भारत में कुछ जनजातियां इसके मांस को अस्थमा और छाती दर्द की दवा बताकर खाते हैं। बांग्लादेश में एक जनजाति विशेष इसके रोंए का इस्तेमाल कंपकंपी वाले ज्वर के लिए इस्तेमाल करती है। इंडिया में भी कुछ जनजातियां इसे खाती हैं।



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