बीजापुर से पंकज दाऊद की रिपोर्ट...
लोक सभा चुनाव में महाराष्ट्र से सटे गांव सण्ड्रा के लोगों को वोटिंग करने 63 किमी दूर भोपालपटनम आना पड़ेगा। सण्ड्रा और इसके आसपास बसे गांवों के लोगों का भोपालपटनम में आकर वोटिंग करना बेहद मुश्किल है क्योंकि इस गांव तक कोई गाड़ी आना जाना नहीं करती है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, इसके पहले भी विस व लोस चुनाव में सालों से ऐसा होता आ रहा है।
भोपालपटनम ब्लॉक के सण्ड्रा, चेरपल्ली, बड़ेकाकलेड़, एड़ापल्ली, एरपागुट्टा, पिल्लूर, पालसेगुण्डी, कांदलापर्ती समेत कई गांव ऐसे हैं, जहां पोलिंग बूथ नहीं बनाए गए हैं। भोपालपटनम से सेण्ड्रा 61, चेरपल्ली 63, बड़ेकाकलेड़ 27, एड़ापल्ली 45, एरपागुट्टा 35, पिल्लूर 22, पालसेगुण्डी 51 एवं कांदलापर्ती 20 किमी दूर है।
बता दें कि सण्ड्रा छग का सबसे अंतिम गांव है और इसके किनारे से बहने वाली इंद्रावती नदी के पार महाराष्ट्र है। छग के इन गांवों के लोग सामान के लिए महाराष्ट्र के दामरेंचा गांव पर आश्रित हैं।
बताते हैं कि विषम भौगोलिक परिस्थिति और अतिसंवेदशील होने के कारण इन गांवों में पोलिंग बूथ नहीं बनाए गए हैं। इन गांवों तक पहुंचने में दो पहाड़ों और पगडण्डी का रास्ता तय करना पड़ता है। हालांकि, कुछ साल पहले इन गांवों के कुछ लोग भोपालपटनम और बीजापुर में आकर बस गए। इनके लिए मतदान करना आसान है।
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चुनाव कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक 10 अप्रैल को 82 दल सड़क मार्ग से रवाना होंगे। इनके बूथ या तो मेन रोड के किनारे हैं या फिर आसानी से पहुंच वाले गांवों में हैं। 9 अप्रैल को इन्हें वोटिंग के सामान दिए गए। 8 अप्रैल को 50 दल रवाना हुए थे। इनमें से 40 दलों को हेलीकॉप्टर से भेजा गया। 9 अप्रैल को 113 दलों को भेजा जा रहा है।
कैम्प में ही भोजन: मतदान कर्मियों के लिए भोजन और रहने की व्यवस्था सीआरपीएफ, सीएएफ के कैम्पों और थानों में की जा रही है। वोटिंग के बाद भी वे रात वहीं गुजारेंगे। पिछले विस चुनाव में भैरमगढ़ ब्लॉक के बिरियाभूमि में एक दल को जंगल में ही रात गुजारनी पड़ी थी क्योंकि रास्ते में आईईडी का खतरा था।




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