रायपुर। छत्तीसगढ़ में आगामी दिनों में होने वाले निकाय चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की जगह बैलेट पेपर से होंगे। मंगलवार को नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में हुई छत्तीसगढ़ सरकार की सब कैबिनेट कमेटी की बैठक में इस पर मुहर लग गई।
वहीं मध्यप्रदेश की तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ में भी स्थानीय निकाय चुनाव में नगरपालिकाओं, निगमों के प्रमुखों का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से किया जाएगा। मंगलवार को मंत्रीमंडलीय उपसमिति की बैठक के बाद मंत्रियों ने यह ऐलान किया।
इस बैठक में मंत्री शिव डहरिया, मो अकबर और रविंद्र चौबे शामिल हुए। बैठक के बाद मंत्रियों के दल ने मीडिया को बताया कि यह फैसला स्थानीय सरकार को मजबूत करने के लिए किया गया है। इससे पार्षद ताकतवर होंगे।
बताया गया है कि इस फैसले को अब कैबिनेट में रखा जाएगा। उसके बाद अध्यादेश लाकर इसे पूरा कर लिया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक अगले दो दिनों के भीतर या आने वाले सप्ताह में कैबिनेट की बैठक हो सकती है। मंत्री शिव डहरिया ने कहा कि मसौदा तैयार है, कैबिनेट में इसके लिए प्रस्ताव रखा जाएगा।
बता दें कि निकाय चुनाव की प्रक्रिया में बदलाव के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीन मंत्रियों की उपसमिति गठित की थी। सीएम भूपेश ने महापौर अथवा अध्यक्ष के सीधे निर्वाचन प्रक्रिया को बदलने के संकेत पहले ही दे चुके थे। वहीं बीजेपी इस फैसले का विरोध कर रही है। भाजपा ने कांग्रेस पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
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गौरतलब है कि अविभाजित मध्यप्रदेश में 1994 में महापौर-अध्यक्षों का निर्वाचन पार्षदों के जरिए होता था। इसके बाद यह व्यवस्था बदली और फिर 1999 में महापौर और अध्यक्ष के सीधे चुनाव होने लगे। सरकार के इस निर्णय पर पूर्व सीएम और भाजपा नेता डॉ रमन सिंह ने कहा कि इस फैसले के द्वारा कांग्रेस सत्ता का दुरुपयोग करेगी। यह जनता के निर्णय को बदलने की साजिश है।
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